दौर-ए-चुनाव में कहाँ कोई इंसान नजर आता है

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दौर-ए-चुनाव में कहाँ कोई इंसान नजर आता है,
कोई हिन्दू, कोई दलित तो कोई मुसलमान नजर आता है;
बीत जाता है जब इलाकों में चुनाव का दौर,
तब हर शख्स रोटी के लिये परेशान नजर आता है!

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